पत्रकारों के उत्पीड़न और फर्जी मुकदमों पर कानून बनाने की उठी मांग
उत्तर प्रदेश पत्रकार समाज कल्याण सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एडवोकेट हरिमोहन दुबे ने पत्रकारों को हितों के लेकर उठाई मांग
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और उनके अधिकारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज होती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश पत्रकार समाज कल्याण सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एडवोकेट हरिमोहन दुबे ने पत्रकारों के कथित उत्पीड़न फर्जी मुकदमों और उन्हें निशाना बनाए जाने के मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है लेकिन वर्तमान समय में कई पत्रकारों को मानसिक सामाजिक और प्रशासनिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का वह वर्ग है जो आम जनता की समस्याओं, भ्रष्टाचार, अव्यवस्थाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करता है। लेकिन कई बार सच सामने लाने वाले पत्रकारों को विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में पत्रकारों को लक्ष्य बनाकर उनके विरुद्ध फर्जी मुकदमे दर्ज करने, अनावश्यक दबाव बनाने और उन्हें भयभीत करने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं।एडवोकेट हरिमोहन दुबे ने कहा कि यदि कोई पत्रकार निष्पक्षता के साथ किसी जनहित के मुद्दे को उठाता है, तो उसके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की शिकायतें भी सामने आती हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार की परिस्थितियां पत्रकारिता की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण मिलना चाहिए ताकि वे निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से अपना कार्य कर सकें।उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा देश के प्रधानमंत्री से इस विषय को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए एक मजबूत कानूनी व्यवस्था बनाए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उनका कहना है कि पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए ऐसा कानून होना चाहिए, जिससे पत्रकारों को अनावश्यक उत्पीड़न या गलत तरीके से फंसाने की आशंकाओं से राहत मिल सके।उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी पत्रकार के खिलाफ कोई शिकायत हो तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की कार्रवाई तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता और जवाबदेही दोनों महत्वपूर्ण हैं, इसलिए ऐसे प्रावधानों पर विचार होना चाहिए जो निष्पक्षता बनाए रखें।पत्रकार समाज के विभिन्न वर्गों में भी इस विषय को लेकर चर्चा होती रही है कि पत्रकारों की सुरक्षा और कार्य संबंधी चुनौतियों पर व्यापक विमर्श की आवश्यकता है। पत्रकारों का मानना है कि समाज और शासन के बीच सेतु के रूप में कार्य करने वाले मीडिया कर्मियों को सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण मिलना चाहिए ताकि वे अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।एडवोकेट हरिमोहन दुबे ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब समाज के सभी वर्गों को अपनी बात रखने और निष्पक्ष रूप से कार्य करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम भी है। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा, अधिकारों और स्वतंत्र कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही पत्रकारों से जुड़े मामलों में संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे निष्पक्ष पत्रकारिता को प्रोत्साहन मिल सके।




















