टांडा क्षेत्र के ओझीपुर फीडर से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए बिजली आपूर्ति की समस्या अब महज कटौती तक सीमित नहीं रह गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फीडर क्षेत्र में तैनात लाइनमैन सूरज द्वारा बार-बार शटडाउन लिए जाने के कारण पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उपभोक्ताओं के मुताबिक सुबह से शाम तक कई-कई बार शटडाउन लिया जाता है और एक दिन में करीब 20 बार बिजली बंद होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार होने वाले शटडाउन के कारण कुल मिलाकर करीब छह घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। भीषण गर्मी और उमस के बीच बार-बार बिजली गुल होने से घरों, दुकानों, छोटे कारोबारों और किसानों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि ओझीपुर फीडर से जुड़े बड़े इलाके में करीब 50 हजार लोग इस समस्या से प्रभावित हो रहे हैं।
एक-दो बार नहीं, बार-बार लिया जा रहा शटडाउन उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली आपूर्ति बहाल होने के कुछ ही समय बाद दोबारा शटडाउन ले लिया जाता है। इससे लोगों को यह समझना मुश्किल हो रहा है कि आखिर बिजली कटौती विभागीय व्यवस्था के कारण हो रही है या स्थानीय स्तर पर बार-बार शटडाउन लिए जाने के कारण ग्रामीणों के अनुसार सुबह से शाम तक करीब 20 बार बिजली बंद होने की स्थिति में घरों में पंखे, कूलर और अन्य विद्युत उपकरण बेकार पड़े रहते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को गर्मी में सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।
‘लाइन में काम है’ के नाम पर घंटों बिजली बंद?
स्थानीय उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि वास्तव में लाइन पर काम या तकनीकी समस्या के कारण शटडाउन लिया जा रहा है तो उसकी निर्धारित अवधि और कारण की जानकारी उपभोक्ताओं को क्यों नहीं दी जाती? लोगों का कहना है कि बार-बार और लंबे समय तक बिजली बंद रहने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि ओझीपुर फीडर की शटडाउन लॉगबुक, फॉल्ट रजिस्टर और संबंधित लाइनमैन द्वारा लिए गए शटडाउन का रिकॉर्ड जांचा जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकता है कि किस दिन कितनी बार और कितनी देर के लिए शटडाउन लिया गया।
गर्मी में बिजली कटौती ने बढ़ाई मुश्किलें
इन दिनों तापमान और उमस के बीच बिजली की नियमित आपूर्ति लोगों के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन ओझीपुर फीडर क्षेत्र में बार-बार बिजली गुल होने की शिकायतों ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बिल समय से लिया जाता है, लेकिन आपूर्ति व्यवस्था लगातार बाधित रहती है।
लोगों ने विद्युत विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से तत्काल मामले की जांच कराकर अनावश्यक शटडाउन पर रोक लगाने तथा निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि यदि एक ही फीडर पर रोजाना इतनी बार शटडाउन लिया जा रहा है तो इसकी निगरानी कौन कर रहा है? शटडाउन लेने की अनुमति और अवधि का रिकॉर्ड क्या है? और यदि शटडाउन तकनीकी कार्य के लिए लिया जा रहा है तो बार-बार होने वाली समस्या का स्थायी समाधान कब होगा? इन सवालों के जवाब बिजली विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।



















