अखंड नगर में सीएचओ संघ का आंदोलन का ऐलान: लंबित मांगों और असहयोग से चरमरा सकती है स्वास्थ्य सेवाएं

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अखण्डनगर /सुल्तानपुर

 

उत्तर प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों और उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। ‘एसोसिएशन ऑफ हेल्थ ऑफिसर, उत्तर प्रदेश’ (ACHOUP) के बैनर तले जारी चेतावनी के बाद स्थानीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। यदि शासन स्तर पर जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में ग्रामीण अंचलों की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।

क्या हैं मुख्य विवाद और मांगें?

संघ का मुख्य आरोप है कि वर्ष 2024 में हुए पिछले आंदोलन के दौरान शासन और विभागीय अधिकारियों के साथ कई मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन आज तक उन परवानों को अमलीजामा नहीं पहनाया गया। सीएचओ की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

पृथक कैडर का गठन: सीएचओ के लिए एक अलग कैडर बनाकर उनके नियमितीकरण हेतु स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाई जाए।

मानदेय और इंसेंटिव: आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (AB-HWC) की संचालन गाइडलाइन के अनुसार समय पर मानदेय और इंसेंटिव का भुगतान सुनिश्चित हो।

स्थानांतरण नीति: एसबीआई (SBI) के अंतर्गत सीएचओ के लिए सुगम स्थानांतरण नीति लागू की जाए।

अन्य सुरक्षा एवं भत्ते: नियमित भर्तियों में सीएचओ के अनुभव को प्राथमिकता दी जाए, साथ ही रिस्क भत्ता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।

प्रस्तावित आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम

सरकार का ध्यान अपनी इन जायज मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए संघ ने एक कड़ा कार्यक्रम तय किया है:

28-29 सितंबर 2026: प्रदेशभर के सीएचओ काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएंगे। इस दौरान वे अपने-केवल आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर उपस्थित रहकर ऑनलाइन कार्य पूरी तरह बंद रखेंगे।

30 सितंबर 2026: सभी सीएचओ लखनऊ में एकत्रित होकर आगामी चरण के आंदोलन और अनिश्चितकालीन धरने की रूपरेखा तय करेंगे।

स्थानीय स्तर पर ज्ञापन और चेतावनी

अखंड नगर क्षेत्र में भी इस आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। अखंड नगर के अधीक्षक सतेन्द्र सिंह की गैर-मौजूदगी में संघ के प्रतिनिधियों द्वारा डॉ. विष्णु देव यादव को सौरभ सिंह ,रितू ,प्रवेश, राहुल ,शशिकांत वर्मा,सुमन,आलोक, नीलम, रजनीश,आदि द्वारा ज्ञापन सौंपा गया। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 2024 की सहमतियों और लंबित मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और अधिक उग्र होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

 

नरेश कुमार केमास न्यूज पत्रकार अखण्डनगर सुल्तानपुर

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