अखण्डनगर सुल्तानपुर
अखण्डनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में “प्लूरल टैप” यानी फेफड़ों के आसपास छाती में जमा पानी निकालने की जटिल चिकित्सीय प्रक्रिया का लगातार सफलतापूर्वक किया जाना केवल एक चिकित्सा उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में जन्म लेती नई आशा का प्रतीक बन चुका है। विशेष बात यह है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर इस प्रकार का उपचार न केवल जिले बल्कि आसपास के कई जिलों और पूरे मंडल में भी शायद ही कहीं नियमित रूप से हो पाता हो। ऐसे में अखण्डनगर सीएचसी में अब तक पांचवीं बार इस प्रक्रिया का सफल संपादन होना यह दर्शाता है कि यहां केवल औपचारिक चिकित्सा नहीं, बल्कि गंभीर मरीजों के लिए वास्तविक और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
जब किसी मरीज की छाती में पानी भर जाता है, तब उसे सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, घुटन और बेचैनी होने लगती है। ऐसी स्थिति में “प्लूरल टैप” प्रक्रिया मरीज के लिए जीवनरक्षक साबित होती है, जिसमें फेफड़ों के आसपास जमा अतिरिक्त पानी को सावधानीपूर्वक बाहर निकाला जाता है। सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को इसके लिए मेडिकल कॉलेजों या बड़े शहरों के अस्पतालों की ओर भागना पड़ता है, लेकिन अखण्डनगर में यह सुविधा उपलब्ध होना ग्रामीण जनता के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
दरअसल, यह उपलब्धि केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि एक चिकित्सक की व्यक्तिगत दक्षता, अनुभव और सेवा भावना की भी कहानी है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने अपने चिकित्सकीय कौशल, आत्मविश्वास और मरीजों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण के बल पर यह संभव कर दिखाया है। सीमित संसाधनों के बीच लगातार पांच मरीजों का सफल उपचार यह सिद्ध करता है कि यदि डॉक्टर अपने दायित्व को केवल नौकरी नहीं बल्कि सेवा का माध्यम मान ले, तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी बड़े अस्पतालों जैसी भरोसेमंद चिकित्सा दे सकते हैं।
ग्रामीण गरीब परिवारों के लिए बीमारी अक्सर आर्थिक संकट और मानसिक पीड़ा का कारण बन जाती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर इस प्रकार की जटिल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना हजारों परिवारों के लिए आश्वासन और राहत का विषय है। यह घटना लोगों के भीतर यह विश्वास भी मजबूत कर रही है कि आने वाले समय में गांवों में और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं विकसित हो सकती हैं।
के मास न्यूज संवाददाता दोस्त पुर


















